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Alcoholic Liver Disease ka kya upchaar hai?

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule5 min read Playing…
Alcoholic Liver Disease ka kya upchaar hai?

अल्कोहलिक लिवर डिजीज (Alcoholic Liver Disease): कारण, लक्षण 

 
शराब पीना समाज में एक आम आदत बन चुकी है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह आदत धीरे-धीरे उनके सबसे जरूरी अंग — लिवर — को अंदर से खोखला कर रही होती है। अल्कोहलिक लिवर डिजीज (Alcoholic Liver Disease) एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो वर्षों तक चुपचाप बढ़ती रहती है और जब तक लक्षण दिखते हैं.

भारत में शराब से जुड़े लिवर रोग तेजी से बढ़ रहे हैं और यह पुरुषों में लिवर फेलियर के प्रमुख कारणों में से एक है। अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते पहचान हो जाए और शराब छोड़ दी जाए तो लिवर खुद को काफी हद तक ठीक कर सकता है। इस लेख में हम अल्कोहलिक लिवर डिजीज के हर पहलू को सरल भाषा में समझेंगे।

अल्कोहलिक लिवर डिजीज क्या है?

लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है और यह 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य करता है — जैसे भोजन पचाना, खून साफ करना, विषाक्त पदार्थ बाहर निकालना और प्रोटीन बनाना। जब हम शराब पीते हैं तो लिवर उसे तोड़कर शरीर से बाहर करने की कोशिश करता है। लेकिन इस प्रक्रिया में कुछ हानिकारक रसायन बनते हैं जो लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं।

अल्कोहलिक लिवर डिजीज दरअसल तीन चरणों में विकसित होती है। पहला चरण फैटी लिवर (Alcoholic Fatty Liver / Steatosis) है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा होने लगती है। यह सबसे शुरुआती और उलटा हो सकने वाला चरण है। अगर इस चरण में शराब बंद कर दी जाए तो लिवर कुछ हफ्तों में सामान्य हो सकता है। दूसरा चरण है अल्कोहलिक हेपेटाइटिस (Alcoholic Hepatitis) जिसमें लिवर में सूजन आ जाती है। यह हल्की से लेकर जानलेवा तक हो सकती है। तीसरा और सबसे गंभीर चरण है सिरोसिस (Cirrhosis), जिसमें लिवर की सामान्य कोशिकाएं नष्ट होकर घाव के ऊतकों (scar tissue) में बदल जाती हैं। यह स्थिति अधिकतर मामलों में अपरिवर्तनीय होती है।

अल्कोहलिक लिवर डिजीज के कारण?

अल्कोहलिक लिवर डिजीज का सीधा और मुख्य कारण लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन है। लेकिन केवल शराब पीने से ही यह बीमारी नहीं होती — कई अन्य कारक मिलकर इसे बढ़ावा देते हैं।

शराब की मात्रा और अवधि सबसे महत्वपूर्ण कारक है। पुरुषों में प्रतिदिन 40-80 ग्राम और महिलाओं में 20-40 ग्राम से अधिक शराब का सेवन लिवर को नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है। 10-12 साल तक लगातार भारी मात्रा में शराब पीने से सिरोसिस का खतरा काफी बढ़ जाता है।

आनुवंशिक कारण भी अहम भूमिका निभाते हैं। कुछ लोगों में जीन के कारण अल्कोहल को पचाने वाले एंजाइम कम होते हैं जिससे उनका लिवर अधिक तेजी से प्रभावित होता है। लिंग भी एक महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि महिलाओं का शरीर शराब को पुरुषों की तुलना में अलग तरह से पचाता है और कम मात्रा में शराब से भी उनका लिवर अधिक प्रभावित होता है।

कुपोषण इस बीमारी को तेज करता है। अधिकतर भारी शराब पीने वाले लोग ठीक से खाना नहीं खाते जिससे लिवर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते। हेपेटाइटिस B या C वायरस के संक्रमण के साथ होने पर लिवर की क्षति बहुत तेजी से बढ़ती है। मोटापा भी लिवर पर अतिरिक्त बोझ डालता है और अल्कोहलिक लिवर डिजीज की प्रगति को तेज करता है।
 

जोखिम कारक?

जो लोग प्रतिदिन बड़ी मात्रा में शराब पीते हैं, जिनके परिवार में शराब की लत या लिवर रोग का इतिहास है, जो महिलाएं हैं (क्योंकि उनमें खतरा जल्दी और कम मात्रा में होता है), जिन्हें पहले से हेपेटाइटिस B या C है, जो मोटापे से पीड़ित हैं, जो खाली पेट शराब पीते हैं, और जिनका आहार असंतुलित है — इन सभी में अल्कोहलिक लिवर डिजीज का जोखिम अधिक होता है।
 

अल्कोहलिक लिवर डिजीज के लक्षण?

फैटी लिवर के चरण में अधिकतर लोगों को कोई लक्षण नहीं होते। बीमारी जैसे-जैसे बढ़ती है, लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं।

पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन महसूस होना, थकान और कमजोरी जो आराम से भी ठीक न हो, भूख न लगना और वजन घटना, मतली और उल्टी, और पेट फूलना — ये शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

जैसे-जैसे बीमारी हेपेटाइटिस या सिरोसिस के स्तर पर पहुँचती है, पीलिया (Jaundice) हो सकता है जिसमें त्वचा और आँखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ जाता है। पेट में पानी भरना (Ascites) जिससे पेट बहुत बड़ा और भारी लगने लगता है, पैरों और टखनों में सूजन, हथेलियों का लाल होना, त्वचा पर मकड़ी जैसी नसें दिखना (Spider Angiomas), और मानसिक भ्रम, याददाश्त कमजोर होना या नींद में गड़बड़ी (हेपेटिक एन्सेफेलोपैथी) — ये गंभीर लक्षण हैं जो तुरंत डॉक्टरी ध्यान माँगते हैं। उल्टी में खून आना या काला मल आना आपातकालीन स्थिति का संकेत है।
 
 

संभावित जटिलताएँ?


समय पर इलाज न होने पर अल्कोहलिक लिवर डिजीज कई गंभीर जटिलताओं की ओर ले जा सकती है। लिवर फेलियर (Liver Failure) में लिवर काम करना बंद कर देता है जो जानलेवा स्थिति है। पोर्टल हाइपरटेंशन में लिवर की नसों में दबाव बढ़ने से अन्नप्रणाली और पेट की नसें फूल जाती हैं और फटने पर भारी रक्तस्राव होता है। हेपेटिक एन्सेफेलोपैथी में लिवर खून से अमोनिया नहीं छान पाता जिससे मस्तिष्क प्रभावित होता है और भ्रम, कोमा तक की स्थिति हो सकती है। किडनी फेलियर (Hepatorenal Syndrome) भी हो सकता है। लिवर कैंसर (Hepatocellular Carcinoma) का खतरा सिरोसिस में काफी बढ़ जाता है। बैक्टीरियल संक्रमण (Spontaneous Bacterial Peritonitis) पेट में भरे पानी में हो सकता है जो जानलेवा है।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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