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diabetes mellitus kya hai?

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule4 min read Playing…
diabetes mellitus kya hai?

डायबिटीज मेलिटस क्या है?

डायबिटीज मेलिटस एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें शरीर खून में मौजूद शुगर (ग्लूकोज़) की मात्रा को सही तरीके से नियंत्रित नहीं कर पाता। यह स्थिति तब होती है जब या तो अग्न्याशय (Pancreas) पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नामक हार्मोन नहीं बना पाता, या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पातीं।

इंसुलिन वह हार्मोन है जो खून से शुगर को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम करता है, ताकि उसे ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, जिसे हाई ब्लड शुगर या हाइपरग्लाइसीमिया (Hyperglycemia) कहा जाता है।

अगर लंबे समय तक इसे नियंत्रित न किया जाए, तो यह शरीर के कई अंगों — जैसे आंखें, किडनी, नसें और दिल — पर गंभीर असर डाल सकती है।

क्या डायबिटीज मेलिटस के भी चरण होते हैं?


डायबिटीज में कैंसर या किडनी की बीमारी जैसे औपचारिक (official) नंबर वाले चरण (जैसे स्टेज 1, 2, 3) नहीं होते। इसकी जगह, डायबिटीज को मुख्यतः उसके प्रकार (Types) के आधार पर बांटा जाता है:

1. टाइप 1 डायबिटीज इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर देती है, जिससे शरीर बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बना पाता। यह आमतौर पर बचपन या युवावस्था में शुरू होती है।

2. टाइप 2 डायबिटीज यह सबसे आम प्रकार है, जिसमें शरीर इंसुलिन तो बनाता है, लेकिन कोशिकाएं उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं (इसे इंसुलिन रेसिस्टेंस कहा जाता है)। यह अक्सर वयस्कों में, खासकर मोटापे या गलत जीवनशैली के कारण होती है।

3. गर्भावस्था डायबिटीज :: यह डायबिटीज गर्भावस्था के समय में होती है। बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाती है.

इसके अलावा, डायबिटीज से पहले की एक स्थिति होती है जिसे प्रीडायबिटीज (Prediabetes) कहा जाता है, जिसमें ब्लड शुगर सामान्य से ज़्यादा होती है, लेकिन डायबिटीज जितनी नहीं। यह एक चेतावनी संकेत की तरह है कि अगर जीवनशैली में बदलाव न किया जाए, तो यह पूरी तरह डायबिटीज में बदल सकती है।

डायबिटीज मेलिटस शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

अनियंत्रित डायबिटीज शरीर के लगभग हर हिस्से को प्रभावित कर सकती है:

- खून की नसों पर असर: हाई ब्लड शुगर छोटी और बड़ी दोनों ही तरह रक्त वाहिकाओं  को नुकसान कर सकते है। 

- दिल और हृदय प्रणाली: डायबिटीज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है।

- किडनी पर असर: लंबे समय तक हाई शुगर किडनी की बारीक रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर किडनी फेलियर तक की स्थिति बना सकती है।

- आंखों पर असर: यह रेटिना (आंख के पीछे का हिस्सा) को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे धुंधलापन या अंधापन तक हो सकता है।

- नसों (Nerves) पर असर: हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं (न्यूरोपैथी)।

- घाव भरने में देरी: शुगर ज़्यादा होने से शरीर के घाव और चोटें ठीक होने में ज़्यादा समय लेती हैं, खासकर पैरों में।

- इम्यून सिस्टम पर असर: डायबिटीज से इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है।

लक्षण और कारण?

#डायबिटीज मेलिटस के लक्षण

डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे या कभी-कभी तेज़ी से भी सामने आ सकते हैं। सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

- बार-बार प्यास लगना
- बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में
- अत्यधिक भूख लगना
- बिना किसी कारण के वज़न कम होना (खासकर टाइप 1 में)
- लगातार थकान महसूस होना
- धुंधला दिखाई देना
- हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
- बार-बार इंफेक्शन होना (जैसे त्वचा या मूत्र मार्ग में)
-त्वचा का काला पड़ना, खासकर गर्दन या बगल के हिस्से में (टाइप 2 में आम)
टाइप 1 डायबिटीज में लक्षण अक्सर तेज़ी से सामने आते हैं, जबकि टाइप 2 डायबिटीज में ये धीरे-धीरे विकसित होते हैं और कई बार सालों तक पता भी नहीं चलते।

डायबिटीज मेलिटस किस कारण होता है?

डायबिटीज के कारण उसके प्रकार पर निर्भर करते हैं:
- टाइप 1 डायबिटीज के कारण:
१) शरीर की इम्यून सिस्टम द्वारा इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर गलती से हमला करना (ऑटोइम्यून प्रक्रिया)

२) जेनेटिक (आनुवंशिक) कारक

३) कुछ वायरल इंफेक्शन, जो इम्यून सिस्टम को ट्रिगर कर सकते हैं

- टाइप 2 डायबिटीज के कारण:

१) इंसुलिन रेसिस्टेंस (शरीर की कोशिकाओं का इंसुलिन के प्रति सही प्रतिक्रिया न देना)
२) मोटापा, खासकर पेट के आसपास अतिरिक्त वसा
३) शारीरिक गतिविधि की कमी
४ ) पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक कारण
५ ) उम्र बढ़ना
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