Gangrene kya hai ? kaise failta hai?
गैंग्रीन क्या है?
गैंग्रीन एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जिसमें शरीर के किसी हिस्से के ऊतक (टिश्यू) मरने लगते हैं। यह तब होता है जब उस हिस्से तक रक्त की आपूर्ति (Blood Supply) पूरी तरह या आंशिक रूप से रुक जाती है या कोई गंभीर संक्रमण हो जाता है। सबसे अधिक प्रभावित अंगों में उंगलियाँ, पैर, हाथ, नाक, कान और कभी-कभी आंतरिक अंग भी शामिल होते हैं।
साधारण शब्दों में, जब शरीर के किसी हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिलता, तो वहाँ के ऊतक सड़ने लगते हैं — इसे ही गैंग्रीन कहते हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है और शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है।
गैंग्रीन कैसे होता है?
गैंग्रीन तीन मुख्य तरीकों से होता है:
१) रक्त प्रवाह में रुकावट :
जब किसी कारणवश धमनियाँ बंद हो जाती हैं, तो उस हिस्से में खून नहीं पहुँच पाता। बिना ऑक्सीजन के कोशिकाएँ मरने लगती हैं और गैंग्रीन विकसित हो जाता है।
२)गंभीर संक्रमण:
बैक्टीरिया, विशेषकर क्लॉस्ट्रिडियम जैसे बैक्टीरिया, ऊतकों को तेजी से नष्ट कर सकते हैं। यह अक्सर गहरे घावों या चोटों में होता है।
३)चोट या ट्रॉमा:
गंभीर जलन, फ्रॉस्टबाइट (अत्यधिक ठंड से क्षति), कुचलने वाली चोट या लंबे समय तक दबाव पड़ने से ऊतक क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और गैंग्रीन हो सकता है।
गैंग्रीन के प्रकार?
गैंग्रीन ४ प्रकार का होता है:
1. ड्राई गैंग्रीन
यह तब होता है जब रक्त प्रवाह धीरे-धीरे कम हो जाता है। प्रभावित हिस्सा सूख जाता है, काला या भूरा हो जाता है और सिकुड़ने लगता है। यह आमतौर पर मधुमेह और धमनियों की बीमारी वाले लोगों में देखा जाता है।
2. वेट गैंग्रीन
यह संक्रमण के कारण होता है। प्रभावित हिस्सा सूज जाता है, बदबू आती है और उसमें मवाद बन सकता है। यह अधिक खतरनाक होता है क्योंकि यह तेजी से फैलता है।
3. गैस गैंग्रीन
यह क्लॉस्ट्रिडियम बैक्टीरिया के कारण होता है। इसमें ऊतकों के अंदर गैस बनती है, जिससे सूजन और तेज दर्द होता है। यह आपातकालीन स्थिति है।
4. इंटरनल गैंग्रीन
यह शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे आंत, पित्ताशय या अपेंडिक्स में होता है जब वहाँ रक्त प्रवाह रुक जाता है।

गैंग्रीन के कारण?
गैंग्रीन के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
१ ) मधुमेह :
डायबिटीज के कारण नसें कमजोर हो जाती हैं और रक्त संचार धीमा पड़ जाता है, जिससे पैरों में गैंग्रीन का खतरा बढ़ जाता है।
२) धमनियों का सख्त होना :
इसमें धमनियों में फैट जम जाता है और खून का प्रवाह बाधित होता है।
३) धूम्रपान :
सिगरेट पीने से रक्त वाहिकाएँ संकुचित हो जाती हैं और रक्त प्रवाह कम हो जाता है।
४) गंभीर चोट या दुर्घटना:
कट, जलन, या कुचलने वाली चोट से ऊतक क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
५) इम्यून सिस्टम कमजोर होना:
कैंसर, एचआईवी, या लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वालों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
६) संक्रमण:
गहरे घावों में बैक्टीरिया प्रवेश कर सकते हैं और गैंग्रीन पैदा कर सकते हैं।
७) लंबे समय तक दबाव:
बेड पर पड़े मरीजों में एक ही जगह पर दबाव पड़ने से बेड सोर (Pressure Ulcer) बन सकता है, जो आगे चलकर गैंग्रीन में बदल सकता है।

गैंग्रीन के लक्षण?
गैंग्रीन के लक्षण उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करते हैं। सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
#बाहरी गैंग्रीन के लक्षण:
• त्वचा का रंग बदलकर काला, नीला या गहरा भूरा हो जाना
• प्रभावित हिस्से में तेज दर्द या सुन्नता
• त्वचा ठंडी और सूखी महसूस होना
• बदबूदार तरल का रिसाव (वेट गैंग्रीन में)
• सूजन और लालिमा
•छाले या फफोले बनना
#आंतरिक गैंग्रीन के लक्षण:
• तेज पेट दर्द
• बुखार
• उल्टी और जी मिचलाना
• कमजोरी और चक्कर आना
• गंभीर मामलों में शॉक की स्थिति
गैंग्रीन कितना खतरनाक है?
गैंग्रीन एक मेडिकल इमरजेंसी है। अगर समय पर इलाज नहीं किया गया तो:
• संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है (सेप्सिस)
• प्रभावित अंग को काटना (Amputation) पड़ सकता है
निष्कर्ष
गैंग्रीन एक गंभीर लेकिन कई मामलों में रोकी जा सकने वाली बीमारी है। शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत इलाज कराने से बड़ी जटिलताओं से बचा जा सकता है। खासकर डायबिटीज और हृदय रोग के मरीजों को अपने शरीर के किसी भी घाव या रंग परिवर्तन को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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