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rheumatic fever treatment in hindi

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule2 min read Playing…
rheumatic fever treatment in hindi

#रूमैटिक फीवर (Rheumatic Fever)?

रूमैटिक फीवर सूजन संबंधी रोग है, जो की, प्रायः अनट्रीटेड स्ट्रेप थ्रोट या स्कार्लेट फीवर की जटिलता के रूप में विकसित होता है।
- यह रोग शरीर के कई भागों को असर कर सकता है, जैसे की, हृदय, जोड़ों, त्वचा और मस्तिष्क।

- यदि सही समय पर सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर हृदय संबंधी की समस्याओं का कारण बन सकता है।


२)रूमैटिक फीवर के कारण?


- स्ट्रेप्टोकॉकस बैक्टीरिया संक्रमण :– गले में संक्रमण का सही इलाज न होने पर हो सकता है.

- प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया :– बैक्टीरिया से लड़ते समय हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया शरीर के ऊतक पर हमला करने लग जाती है. जिससे सूजन होता है।


#प्रमुख लक्षण?


गले के संक्रमण से 2 से 4 हफ्ते के बाद रूमैटिक फीवर के लक्षण प्रकट होने लगते हैं:

 - जोड़ों में दर्द है रहना और सूजन

 - त्वचा पर लाल धब्बे का हो जाना

 - बुखार और थकान जैसा लगना

 

३)संभावित जटिलताएँ?


यदि रूमैटिक फीवर का इलाज समय पर न किया जाए तो यह गंभीर परिणाम दे सकता है:

 - रूमैटिक हार्ट डिज़ीज़ : – हृदय वाल्व को नुकसान पहुँच सकता है।

 - क्रॉनिक जोड़ों की प्रॉब्लम ।

 - मस्तिष्क संबंधी गड़बड़ियाँ।

 

४)निदान?


डॉक्टर निम्नलिखित की जाँच कर सकते हैं, जैसे की,

 - गले की स्वैब टेस्ट

 - खून की जाँच

 - ईसीजी या इकोकार्डियोग्राफी

 

५)उपचार?


रूमैटिक फीवर का इलाज लक्षणों को कम करने और हृदय को होने वाले नुकसान से बचाने पर केंद्रित होता है: 

 - एंटीबायोटिक्स :– स्ट्रेप्टोकॉकस संक्रमण को खत्म करने के लिए।

 - एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाइयाँ :– दर्द और सूजन को कम करने के लिए 

 - एंटी-सीज़र दवाइयाँ – अनियंत्रित गतिविधियों के लिए।

 -दीर्घकालिक एंटीबायोटिक प्रॉफिलैक्सिस :– दोबारा संक्रमण रोकने के लिए कई सालों तक पेनिसिलिन इंजेक्शन दिए जाते हैं।

 

#बचाव के उपाय?


- डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक्स का कोर्स जब तक डॉक्टर नहीं बोले तब तक उस कोर्स को करना चाहिए. 

 - बच्चों में बार-बार गले की खराश होने पर जांच करना सही है।

 - हृदय की समस्या वाले मरीजों को नियमित जाँच करवाते रहना चाहिए।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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