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Thalassemia bimari kya hai? or kyu hoti hai?

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule5 min read Playing…
Thalassemia bimari kya hai? or kyu hoti hai?

थैलेसीमिया (Thalassemia) बीमारी क्या है?

हमारे रक्त में लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं। इन कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक एक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन को अपने साथ बांधकर चलता है। स्वस्थ व्यक्ति में हीमोग्लोबिन सही मात्रा और सही बनावट में बनता है।

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में या सही प्रकार का हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके कारण लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य से कम और कमजोर होती हैं तथा जल्दी नष्ट हो जाती हैं। परिणामस्वरूप शरीर में खून की लगातार कमी बनी रह सकती है जिसे एनीमिया कहते हैं।

यह बीमारी मुख्य रूप से रक्त और अस्थि मज्जा (Bone Marrow) को प्रभावित करती है। गंभीर अवस्था में लीवर, प्लीहा (Spleen), हृदय, और हड्डियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

थैलेसीमिया एक जन्मजात बीमारी है जो माता-पिता से बच्चे में जीन के माध्यम से आती है। यह बीमारी भूमध्यसागरीय, मध्य पूर्व, दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी मूल के लोगों में अधिक देखी जा सकती है। भारत में भी थैलेसीमिया के मामले बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। यह बच्चों में जन्म से या शैशवावस्था में ही पहचानी जा सकती है।

बीमारी के प्रकार?

थैलेसीमिया मुख्यतः दो प्रकार का होता है:
1. अल्फा थैलेसीमिया (Alpha Thalassemia):
इसमें हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी अल्फा चेन प्रोटीन कम या अनुपस्थित हो सकता है। इसकी गंभीरता इस बात पर निर्भर हो सकती है कि कितने जीन प्रभावित हैं। हल्के प्रकार में कोई लक्षण नहीं हो सकते जबकि गंभीर प्रकार जानलेवा हो सकता है।

2. बीटा थैलेसीमिया (Beta Thalassemia):
इस प्रकार भारत में अधिक सामान्य रूप से देखा जा सकता है। इसमें बीटा चेन प्रोटीन प्रभावित होता है। इसके तीन उपप्रकार हो सकते हैं:
थैलेसीमिया माइनर (Thalassemia Minor / Trait): व्यक्ति इस बीमारी का वाहक होता है। आमतौर पर कोई गंभीर लक्षण नहीं होते लेकिन हल्की खून की कमी हो सकती है।

थैलेसीमिया इंटरमीडिया: मध्यम गंभीरता का प्रकार जिसमें कुछ लक्षण हो सकते हैं।

थैलेसीमिया मेजर (Thalassemia Major): यह सबसे गंभीर प्रकार है। इसमें गंभीर एनीमिया हो सकता है और नियमित चिकित्सीय देखरेख आवश्यक होती है।

संभावित कारण?

थैलेसीमिया पूरी तरह एक आनुवंशिक बीमारी है। यह जीवनशैली या पर्यावरण से नहीं होती:

- आनुवंशिक कारण: यह बीमारी हीमोग्लोबिन बनाने वाले जीन में दोष के कारण होती है। यह दोष माता-पिता से बच्चे में जाता है। यदि माता-पिता दोनों थैलेसीमिया के वाहक हों तो बच्चे में गंभीर थैलेसीमिया होने की संभावना हो सकती है।

- वाहक माता-पिता: यदि माता या पिता में से केवल एक थैलेसीमिया माइनर हो तो बच्चे में भी वाहक होने की संभावना हो सकती है। यदि दोनों वाहक हों तो हर गर्भावस्था में थैलेसीमिया मेजर की 25% संभावना हो सकती है।

- पारिवारिक इतिहास: जिन परिवारों में थैलेसीमिया का इतिहास हो उनमें अगली पीढ़ी में यह बीमारी आने की संभावना हो सकती है।

- भौगोलिक और जातीय कारण: कुछ क्षेत्रों और जातीय समूहों में इस जीन दोष की प्रवृत्ति अधिक पाई जा सकती है जिससे इन समुदायों में थैलेसीमिया अधिक देखा जा सकता है।
ध्यान दें: यह बीमारी छुआछूत से नहीं फैलती, किसी कमजोरी या लापरवाही से नहीं होती — यह पूरी तरह जीन से जुड़ी स्थिति है।

लक्षण?

थैलेसीमिया के लक्षण उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करते हैं। हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं।

#शुरुआती लक्षण
- शिशु या छोटे बच्चे में अत्यधिक पीलापन और थकान दिखाई दे सकती है
- बच्चे का विकास सामान्य से धीमा हो सकता है
- दूध पीने में या खाने में अरुचि हो सकती है
- बच्चा सामान्य से अधिक चिड़चिड़ा या कमजोर दिखाई दे सकता है
- त्वचा और आंखों में हल्का पीलापन कुछ मामलों में हो सकता है

#सामान्य लक्षण
- गंभीर थकान और कमजोरी जो सामान्य आराम से ठीक न हो
-त्वचा का पीला या पीलापन लिए हुए रंग होना
-प्लीहा (Spleen) और लीवर का आकार बढ़ सकता है जिससे पेट बड़ा दिखाई दे सकता है
-हड्डियों में दर्द कुछ लोगों में देखा जा सकता है
-बच्चों में चेहरे की हड्डियों में बदलाव हो सकता है — विशेष रूप से माथा और गाल की -हड्डियां उभरी हुई दिख सकती हैं
-सांस फूलने की संभावना हो सकती है
-बार-बार संक्रमण होने की प्रवृत्ति हो सकती है

#गंभीर अवस्था में दिखाई देने वाले लक्षण
-गंभीर एनीमिया के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है
-हड्डियां कमजोर और भंगुर हो सकती हैं जिससे फ्रैक्चर की संभावना बढ़ सकती है
-बच्चे की सामान्य शारीरिक और मानसिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है
-लीवर और प्लीहा में अत्यधिक वृद्धि के कारण पेट में दर्द और भारीपन हो सकता है
-त्वचा का रंग गहरा पड़ सकता है
-यौवन में देरी हो सकती है
ध्यान दें: थैलेसीमिया माइनर में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते और व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। डॉक्टर स्थिति के अनुसार मूल्यांकन करते हैं।
 
 
निष्कर्ष
थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में जागरूकता न केवल प्रभावित बच्चों के लिए बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी सबसे जरूरी बात यह है कि यदि माता-पिता दोनों थैलेसीमिया के वाहक हों तो विवाह से पहले या गर्भावस्था की योजना बनाते समय आनुवंशिक परामर्श लेना उचित हो सकता है।

यदि परिवार में किसी को थैलेसीमिया हो या बच्चे में असामान्य थकान, पीलापन, या विकास में देरी दिखाई दे तो बिना देर किए किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ या रक्त रोग विशेषज्ञ (Hematologist) से परामर्श लेना महत्वपूर्ण हो सकता है। समय पर पहचान इस बीमारी को बेहतर ढंग से समझने में और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक हो सकती है।
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