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Thrombocytopenia ka ilaaj

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule2 min read Playing…
Thrombocytopenia ka ilaaj

#थ्रोम्बोसाइटोपेनिया

थ्रोम्बोसाइटोपेनिया ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर के खून में प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य से भी कम हो जाती है। प्लेटलेट्स छोटे रक्त की कोशिका होती हैं, जो की खून को जमाने  का काम करती हैं। और किसी भी चोट या कट लगने पर अत्यधिक खून बहने से बचाती हैं।

शरीर में सामान्यतः रक्त प्लेटलेट्स की संख्या लगभग 1,50,000 से 4,50,000 प्रति माइक्रोलीटर होती है। यदि यह संख्या 1,50,000 से भी कम हो जाए, तो इसे थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहा जाता है।


#थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के मुख्य कारण क्या है?


प्लेटलेट्स की संख्या कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: 

- हड्डी के मज्जा से उत्पादन में कमी

 - ल्यूकेमिया , एप्लास्टिक एनीमिया जैसी बीमारियाँ

 - कैंसर का इलाज

 - कुछ दवाइयाँ जो बोन मैरो को असर करती हैं

 - प्लेटलेट्स का तेजी से खत्म होना

 - इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी होना

 - वायरल इंफेक्शन (जैसे की , डेंगू, हेपेटाइटिस, HIV )

 - कुछ दवाइयों से एलर्जी  का होना या उसके दुष्प्रभाव



#थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के लक्षण क्या है?


- त्वचा पर नीले या बैंगनी धब्बे  आसानी से पड़ना

 - छोटे-छोटे लाल या बैंगनी धब्बे

 - बार-बार नाक से खून का  आना या मसूड़ों से खून का बहना

 - चोट लगने पर ज्यादा खून बहना

 -  महिलाओं में मासिक धर्म का रक्तस्राव

 - पेशाब  में  से खून का आना


 

#थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का निदान?


थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर कुछ जांचें कर सकते हैं, जैसे की ,

- कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) : – खून में प्लेटलेट्स की संख्या का पता लगाने के लिया किया जाता है.

 - ब्लड स्मीयर टेस्ट : – प्लेटलेट्स की  आकार की जाँच।

- बायोप्सी : –प्लेटलेट्स के उत्पादन की स्थिति देखने के लिए।

- वायरल मार्कर टेस्ट : – डेंगू, हेपेटाइटिस, HIV बीमारियों की जांच करने के लिए ।


#थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का उपचार?

प्लेटलेट्स की संख्या कितनी कम हो गया है ,इलाज इस बात पर निर्भर करता है.

 -  यदि प्लेटलेट्स की संख्या थोड़ी कम है और कोई लक्षण नहीं हैं, तो केवल निगरानी  ही पर्याप्त होती है।


# थ्रोम्बोसाइटोपेनिया से बचाव और जीवनशैली

डॉक्टर की सलाह के अलावा कोई भी  दवाइयाँ न लें, खासकर वे जो प्लेटलेट्स को असर कर सकती हैं

 - चोट लगने वाले कार्यों  को करने से बचें।

 - संतुलित आहार लें, जिस से की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो।

 - यदि बार-बार खून बहने की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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