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Thyroid bimari kya hai or kyu hoti hai?

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule4 min read Playing…
Thyroid bimari kya hai or kyu hoti hai?

१) थायराइड विकार (Thyroid Disorders) क्या है?

थायराइड हमारे गले के निचले हिस्से में स्थित एक छोटी सी ग्रंथि होती है, जिसका आकार तितली जैसा होता है। यह ग्रंथि 'थायरोक्सिन' (T4) और 'ट्रायोडोथायरोनिन' (T3) नामक हार्मोन से बनाती है।

- इन हार्मोनों का मुख्य कार्य शरीर के मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को नियंत्रित करना है। मेटाबॉलिज्म वह प्रक्रिया है जिससे शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलता है। जब यह ग्रंथि बहुत अधिक या बहुत कम हार्मोन का उत्पादन करने लगती है, तो शरीर की पूरी कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है, जिसे 'थायराइड विकार' कहा जाता है।

२) थायराइड के मुख्य प्रकार?


- हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) : जब ग्रंथि जरूरत से कम हार्मोन बनाती है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।

- हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) :
जब ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। इससे मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है।

- घेंघा (Goiter) :
थायराइड ग्रंथि का असामान्य रूप से बढ़ जाना।

३) थायराइड कैसे होता है?


हमारे मस्तिष्क में एक पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland) होती है, जो 'थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन' (TSH) रिलीज करती है। यह TSH थायराइड ग्रंथि को यह निर्देश देता है कि उसे कितने हार्मोन बनाने हैं।

जब खून में थायराइड हार्मोन का स्तर कम होता है, तो पिट्यूटरी ग्रंथि अधिक TSH बनाती है ताकि थायराइड ग्रंथि सक्रिय हो सके। लेकिन यदि किसी बीमारी या आयोडीन की कमी के कारण थायराइड ग्रंथि रिस्पोंड नहीं कर पाती, तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और बीमारी पैदा होती है।



४) थायराइड के मुख्य कारण?


थायराइड विकारों के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

 - आयोडीन की कमी या अधिकता: थायराइड हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन अनिवार्य है। इसकी कमी से हाइपोथायरायडिज्म और अधिकता से हाइपरथायरायडिज्म हो सकता है।

 - ऑटोइम्यून बीमारियां: हाशिमोटो रोग (Hashimoto's disease): इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही थायराइड ग्रंथि पर हमला कर उसे कमजोर कर देता है।

 - ग्रेव्स रोग (Graves' disease): यह ग्रंथि को अधिक हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है।

 - थायराइडाइटिस: थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाना।

 - जेनेटिक कारण: यदि परिवार में पहले से किसी को थायराइड है, तो इसकी संभावना बढ़ जाती है।

 - तनाव और खराब जीवनशैली: अत्यधिक मानसिक तनाव हार्मोन्स के संतुलन को बिगाड़ देता है।

 - दवाओं का प्रभाव: कुछ विशेष दवाओं के साइड इफेक्ट्स के कारण भी ग्रंथि प्रभावित हो सकती है।

५) थायराइड के लक्षण (Symptoms)?


हाइपो और हाइपर थायराइड के लक्षण एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं:

1. हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण (सुस्त मेटाबॉलिज्म):

- वजन बढ़ना: कम खाने के बावजूद शरीर का वजन तेजी से बढ़ना।

 - थकान और कमजोरी: हर समय थकान महसूस होना और नींद आना।

 - ठंड लगना: सामान्य तापमान में भी अधिक ठंड महसूस करना।

 - कब्ज: पाचन प्रक्रिया धीमी होने के कारण पेट की समस्याएं।

 - त्वचा का रूखापन: स्किन और बालों का रूखा और बेजान होना।

 - मासिक धर्म में अनियमितता: महिलाओं में भारी या अनियमित पीरियड्स।

   2. हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण (तेज मेटाबॉलिज्म):
- वजन कम होना: भूख लगने और अच्छा खाने के बाद भी वजन का लगातार गिरना।

 - घबराहट और बेचैनी: दिल की धड़कन तेज होना (Palpitations) और हाथों का कांपना।

 - गर्मी बर्दाश्त न होना: अधिक पसीना आना और गर्मी के प्रति संवेदनशील होना।

 - नींद की कमी: चाहकर भी ठीक से नींद न आना।

 - आंखों में सूजन: कुछ मामलों में आंखें बाहर की ओर उभरी हुई दिखने लगती हैं।

 

६) जांच और निदान (Diagnosis) क्या है?


थायराइड की पुष्टि के लिए डॉक्टर आमतौर पर 'थायराइड फंक्शन टेस्ट' (TFT) लिखते हैं। इसमें खून की जांच की जाती है जिससे T3, T4 और TSH के स्तर का पता चलता है।

 - यदि TSH का स्तर बढ़ा हुआ है, तो यह हाइपोथायरायडिज्म का संकेत है। यदि TSH का स्तर कम है, तो यह हाइपरथायरायडिज्म हो सकता है।

 "बचाव और प्रबंधन के उपाय"

 - संतुलित आहार: आयोडीन युक्त नमक का सीमित मात्रा में उपयोग करें। हाइपोथायरायडिज्म में सोया उत्पाद और पत्तागोभी जैसी चीजों से परहेज की सलाह दी जा सकती है।

 - नियमित व्यायाम: योग और व्यायाम मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने में मदद करते हैं। 'सर्वांगासन' और 'उज्जयी प्राणायाम' थायराइड के लिए बहुत लाभकारी माने जाते हैं।

 - तनाव प्रबंधन: मेडिटेशन और गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करें।

 - नियमित दवा: डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को खाली पेट और निश्चित समय पर लें।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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