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acute aur chronic pancreas ke factor kya hai

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule3 min read Playing…

१) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस और क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के फैक्टर क्या है?


पैंक्रियाटाइटिस बहुत ही गंभीर बीमारी की स्थिति है, जिसमें अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। अग्न्याशय मानव शरीर के पाचन तंत्र का महत्वपूर्ण भाग है। जो की ,इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन और पाचक एंजाइम को बनाता है।

- इसमें जब सूजन हो जाती है, तो पाचन की प्रक्रिया और शरीर का शुगर लेवल दोनों को असर होते हैं.


*पैंक्रियाटाइटिस २ तरह का होता है*

- १) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस :– ये अचानक से होने वाली, तेज और छोटे समय तक की सूजन हो सकती है.

 - २) क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस : – ये लंबे समय तक होने वाली और बार-बार होने वाली सूजन से होता है।
इन दोनों स्थितियों के होने कई कारण से होते हैं।

*1.एक्यूट पैंक्रियास के कारण*


यह आमतौर पर अचानक से होता है ,और सही इलाज मिलने पर पूरी तरह से ठीक हो सकता है। इसके प्रमुख कारण हैं , जो क इस तरह से है , (क) पित्ताशय की पथरी
- पित्त थैली में बने स्टोन से बाइल डक्ट को ब्लॉक कर देते हैं, जिस से पैनक्रियाटिक सही तरीके से एंजाइम निकल नहीं पाते है ,और पैंक्रियाज में ही एक्टिव होकर सूजन कर देते हैं।

(ख) अधिक मात्र में शराब को पीने से भी पैंक्रियाज की कोशिका को ज्यादा नुकसान होता है.

(ग) जब खून में ट्राइग्लिसराइड का लेवल 1000 mg/dL से भी ज्यादा हो जाने पर भी पैंक्रियाटाइटिस का कारण बनता है।

(घ) कुछ दवाइयाँ के प्रभाव से भी साइड इफेक्ट के रूप में पैंक्रियाज पर प्रभाव होता हैं।

(ङ) कुछ वायरल या बैक्टीरियल के संक्रमण, से भी अग्न्याशय में सूजन का कारण होता है।


*2.क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के कारण*


यह बीमारी लंबे समय तक की चलने वाली बीमारी है, जिस में बार-बार सूजन होती रहती है। और धीरे-धीरे से पैंक्रियाज की कोशिका को नुक्सान होता हैं।

- इसका सबसे बड़ा खतरा मधुमेह या पैंक्रियाटिक कैंसर का कारण बन सकता है।

(क) अल्कोहल का सेवन : लगातार ज्यादा मात्रा में शराब पीने से पैंक्रियाज में सूजन आती है, और यह क्रोनिक रूप में बदल जाता है.

(ख) धूम्रपान : पैंक्रियाटिक डैमेज को असर करता है , और शराब के असर को अधिक गंभीर बना देता है।

(ग) जेनेटिक फैक्टर : कुछ लोगों में पारिवारिक इतिहास से जोखिम को और भी बढ़ा देते हैं।

(घ)ऑटोइम्यून पैंक्रियाटाइटिस : जब हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज पर ही अटैक करने लगता है।

(ङ) पैंक्रियाटिक डक्ट का जन्मजात असामान्य का होना।

(च) खून में बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड या कैल्शियम का लेवल लंबे समय तक पैंक्रियास पर असर होता है.

(छ) अगर बार-बार एक्यूट पैंक्रियास हो तो वह धीरे-धीरे क्रोनिक में हो जाता है.

3. एक्यूट और क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिसके बीच में तुलना?


- शुरुआत : एक्यूट में अचानक से धीरे-धीरे, और क्रोनिक में लंबे समय में

 - अवधि : एक्यूट बीमारी में कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक पर क्रोनिक में लम्बे वर्षों तक जारी।

- मुख्य कारण : एक्यूट में पिताशय की पथरी , कुछ लंबे समय तक शराब, जब की क्रोनिक में धूम्रपान और जेनेटिक फैक्टर.

4. बचाव के क्या उपाय है?


- शराब और धूम्रपान से हमेशा के लिए दूरी बनाएँ।

 - अच्छे डाइट को अपनाएँ जोकि खासकर के लो-फैट और हाई-फाइबर डाइट।

 - नियमित कसरत करे और वजन को कण्ट्रोल में रखें।

 - रक्त शुगर और ट्राइग्लिसराइड की जाँच को करवाते रहें।

 - समय पर गॉलब्लैडर स्टोन का सही इलाज करवाएँ।

    *निष्कर्ष*

 ये दोनों ही बीमारी बहुत ही गंभीर की स्थिति है , जिन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस यह तो अचानक से होता है ,और सही इलाज है , जबकि क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस यह तो लंबे समय तक चलकर अग्न्याशय को स्थायी नुकसान पहुँचा देता है।
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