kidney failure
१) किडनी फेलियर क्या है?
यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गुर्दे शरीर से अपशिष्ट तरल पदार्थ को फ़िल्टर करने में असमर्थ हो जाते हैं. इसे गुर्दे की बीमारी का अंतिम चरण कहते है.
- जहां गुर्दे की कार्य करने की क्षमता बहुत ही कम हो जाती है. और गुर्दे की विफलता के कारण हमारे शरीर में अपशिष्ट तरल पदार्थ जमा होने लग जाते हैं, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
#किडनी का क्या कार्य करना होता है?
मानव शरीर में २ किडनी होती है, जिसका काम रक्त को फिल्टर करना होता है,और अपशिष्ट और पानी को यूरिन के माध्यम से बाहर करना हैं.
- शरीर में खनिजों का संतुलन मेन्टेन करना होता है.
२)किडनी फेलियर के प्रकार?
किडनी फेलियर के २ प्रकार होते है,
- तीव्र गुर्दा विफलता : अचानक से होता है और तीव्र उपचार से सुधर सकता है.
-क्रॉनिक किडनी फेलियर : धीरे-धीरे से बढ़ता है और पूरी तरह नियंत्रित नहीं होता, है पर नियंत्रित किया जा सकता है.

३) किडनी फेलियर के क्या जोखिम कारक होते है?
किडनी फेलियर के जोखिम कारक निचे बताये अनुसार होते है. जैसे की,
- मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर का होना.
- 60 साल से ऊपर की उम्र
- अधिक दर्द निवारक दवाओं का सेवन
- पारिवारिक इतिहास में किडनी की बीमारी होने से जोखिम बढ़ जाता है.

४) किडनी फेलियर के क्या कारण होते है?
किडनी फेलियर होने के कारण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की,
- मधुमेह
- हाई ब्लड प्रेशर
- मूत्र मार्ग में रुकावट
- संक्रमण
- ऑटोइम्यून रोग
- दवाओं का दुष्प्रभाव
किडनी फेलियर का निदान करने के लिए डॉक्टर कुछ जाँच करने को बोलते है, जो की इस तरह से है.
- रक्त का परीक्षण
-यूरिन की जांच
- अल्ट्रासाउंड / CT स्कैन
- दवाओं का दुष्प्रभाव
५) किडनी फेलियर का निदान कैसे होता है?
किडनी फेलियर का निदान करने के लिए डॉक्टर कुछ जाँच करने को बोलते है, जो की इस तरह से है.
- रक्त का परीक्षण
-यूरिन की जांच
- अल्ट्रासाउंड / CT स्कैन
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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