CAPTCHA  

Already register click here to Login

Dont have account click here for Register

Thank You
Ok
clinical_notesDisease

muscular dystrophy treatment in homeopathy

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule4 min read Playing…
muscular dystrophy treatment in homeopathy

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी क्या है?


मस्कुलर डिस्ट्रॉफी कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि 30 से अधिक विभिन्न प्रकार की आनुवंशिक (Genetic) बीमारियों का एक समूह है। इन सभी बीमारियों में एक समानता है: मांसपेशियों का क्षरण (Muscle Wasting)।

 हमारे शरीर में मांसपेशियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए हजारों जीन्स (Genes) काम करते हैं। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी में, जीन के अंदर खराबी आ जाती है, जिससे मांसपेशियां समय के साथ टूटती रहती हैं और उनकी जगह फैट (वसा) या संयोजी ऊतक (connective tissue) ले लेते हैं। इससे प्रभावित व्यक्ति की शारीरिक क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है।

 

यह बीमारी कैसे और क्यों होती है?


इस बीमारी का मुख्य और एकमात्र कारण जेनेटिक म्यूटेशन (Genetic Mutation) है। इसे विस्तार से समझने के लिए हमें शरीर के विज्ञान को थोड़ा समझना होगा: 

   1. प्रोटीन की भूमिका: हमारी मांसपेशियों को ठीक से काम करने और उनकी संरचना को बनाए रखने के लिए एक विशेष प्रोटीन की आवश्यकता होती है, जिसे डिस्ट्रोफिन (Dystrophin) कहा जाता है। यह प्रोटीन मांसपेशियों की कोशिकाओं को एक साथ जोड़े रखता है और उन्हें मजबूती देता है।

   2. जीन में खराबी: मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों में वह जीन (DMD gene) खराब या अनुपस्थित होता है जो डिस्ट्रोफिन प्रोटीन बनाने के लिए जिम्मेदार होता है। 

   3. परिणाम: जब शरीर में डिस्ट्रोफिन प्रोटीन नहीं बनता या कम बनता है, तो मांसपेशियां नाजुक हो जाती हैं। सामान्य गतिविधियों (जैसे चलने-फिरने) से भी मांसपेशियां टूटने लगती हैं और शरीर उन्हें दोबारा ठीक नहीं कर पाता।

यह म्यूटेशन दो तरह से हो सकता है:

• वंशागत (Inherited) : यह माता-पिता से बच्चों में पास होता है। अक्सर माँ इस जीन की वाहक (Carrier) होती है और यह बीमारी उसके बेटे को प्रभावित करती है (विशेषकर Duchenne Muscular Dystrophy में)।

• स्वतःस्फूर्त (Spontaneous) : कभी-कभी परिवार में किसी को बीमारी न होने के बावजूद, बच्चे के जीन में प्राकृतिक रूप से नया बदलाव आ जाता है जिससे यह बीमारी हो जाती है।

बीमारी के प्रमुख लक्षण


मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति को कौन सा प्रकार (Type) है। हालांकि, सबसे आम प्रकार 'ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी' (DMD) है, जो बच्चों में होती है। इसके सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

1. प्रारंभिक लक्षण (बचपन में):

 
     • चलने में देरी: बच्चा देर से चलना शुरू करता है।

     • बार-बार गिरना: चलते या दौड़ते समय संतुलन बनाना मुश्किल होता है।

     • उठने में कठिनाई: जमीन से उठते समय बच्चा अपने हाथों का सहारा अपने घुटनों पर लेता है (इसे Gowers' sign कहते हैं)। 

     • पिंडलियों का बड़ा होना (Large Calf Muscles): पिंडलियों की मांसपेशियां बहुत बड़ी और फूली हुई दिखती हैं, लेकिन वास्तव में वे कमजोर होती हैं क्योंकि उनमें मांसपेशियों की जगह फैट जमा हो जाता है। 

    • पंजे के बल चलना: एड़ी जमीन पर नहीं टिकती।

 

2. प्रगतिशील लक्षण (उम्र बढ़ने के साथ):



       • स्कोलियोसिस (Scoliosis) : रीढ़ की हड्डी का टेढ़ा होना, क्योंकि पीठ की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। 

       • व्हीलचेयर की आवश्यकता : आमतौर पर 12-15 साल की उम्र तक आते-आते बच्चे को चलने के लिए व्हीलचेयर की जरूरत पड़ सकती है। 

       • सांस लेने में तकलीफ : जब छाती की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो सांस लेना मुश्किल हो जाता है। 

       • हृदय की समस्याएं : दिल भी एक मांसपेशी है, इसलिए बाद के चरणों में कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

 

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मुख्य प्रकार (Main Types)


वैसे तो इसके कई प्रकार हैं, लेकिन ये तीन सबसे प्रमुख हैं:

      1. ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Duchenne - DMD) :
 
        • यह सबसे आम और गंभीर प्रकार है।

        • यह मुख्य रूप से लड़कों को प्रभावित करता है।

         • लक्षण 2 से 5 साल की उम्र में शुरू हो जाते हैं। इसमें डिस्ट्रोफिन प्रोटीन पूरी तरह अनुपस्थित होता है।

     2. बेकर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Becker - BMD):

        • यह ड्यूशेन जैसा ही है लेकिन कम गंभीर है।

       • इसमें डिस्ट्रोफिन प्रोटीन बनता तो है, लेकिन कम मात्रा में या खराब गुणवत्ता वाला।

         •इसके लक्षण किशोरावस्था (teens) या 20 की उम्र के बाद भी दिख सकते हैं। 

     3. मायोटोनिक (Myotonic):

     • यह वयस्कों (Adults) में होने वाला सबसे आम प्रकार है।

     • इसमें मांसपेशियों को एक बार सिकुड़ने के बाद रिलैक्स होने में समय लगता है (जैसे हाथ मिलाने के बाद मुट्ठी न खोल पाना)।




इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
event_availableBook Appointment

forumComments

अभी तक कोई कमेंट नहीं — पहला आप कीजिए।

अपना कमेंट लिखें
कमेंट जांच के बाद प्रकाशित किया जाएगा।
Brahm homeo Logo
Brahm Homeopathy
Typically replies within an hour
Brahm homeo
Hi there 👋

How can we help you?
NOW
×
Chat with Us