PCOD / PCOS
PCOD / PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) बीमारी क्या है?
PCOD (Polycystic Ovarian Disease) और PCOS (Polycystic Ovarian Syndrome) महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) से जुड़ी एक हार्मोनल बीमारी है। इसमें अंडाशय में छोटी-छोटी अनेक गांठें (Cysts) बन जाती हैं। यह बीमारी आजकल 15 से 45 साल की महिलाओं में बहुत आम होती जा रही है। PCOD में अंडाशय अपरिपक्व अंडे बनाता है जो बाद में सिस्ट बन जाते हैं। इससे मासिक धर्म अनियमित हो जाता है और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
यह बीमारी कैसे होती है?
PCOD/PCOS में शरीर में पुरुष हार्मोन (Androgen) का स्तर बढ़ जाता है। इससे अंडाशय से हर महीने सामान्य रूप से अंडा नहीं निकल पाता। अंडे अंडाशय में ही रहकर छोटी-छोटी थैलियों (Cysts) में बदल जाते हैं। इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance) भी इस बीमारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बीमारी के कारण (Causes)?
- हार्मोनल असंतुलन — Androgen हार्मोन का अधिक बनना
- इंसुलिन प्रतिरोध — कोशिकाएं इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पातीं
- अनुवांशिक कारण — परिवार में माँ या बहन को हो तो खतरा अधिक
- मोटापा — अतिरिक्त वजन हार्मोन असंतुलन बढ़ाता है
- तनाव और चिंता
- अनियमित जीवनशैली और नींद की कमी
लक्षण (Symptoms)?
- मासिक धर्म अनियमित होना या बंद हो जाना
- चेहरे, छाती और पीठ पर अधिक बाल उगना (Hirsutism)
- चेहरे पर मुंहासे और तैलीय त्वचा
- सिर के बालों का झड़ना
- वजन बढ़ना विशेषकर पेट के आसपास
- गर्भधारण में कठिनाई
- पेट के निचले हिस्से में दर्द
- त्वचा पर काले धब्बे (Acanthosis Nigricans)
महत्वपूर्ण जानकारी
PCOD/PCOS पूरी तरह संभव है अगर सही समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव किया जाए। यह बीमारी अगर अनियंत्रित रहे तो डायबिटीज, हृदय रोग और बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। भारत में हर 5 में से 1 महिला PCOD से पीड़ित है।
क्या खाएं?
- पालक, मेथी, सरसों
- ब्राउन राइस, जौ, ओट्स
- दालचीनी इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती है
- अलसी के बीज हार्मोन संतुलन में सहायक
- मेथी दाना ब्लड शुगर नियंत्रित करता है
- मछली ओमेगा 3 के लिए
क्या न खाएं?
- मैदा और सफेद चावल
- मीठा और मिठाइयां
- कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड जूस
- जंक फूड और फास्ट फूड
- अधिक नमक
- प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद भोजन
- अधिक कैफीन
- शराब और धूम्रपान
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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