ulcerative colitis ka homeopathic me kya ilaaj hai?

१) अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज
अल्सरेटिव कोलाइटिस "क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD)" है, जिस में बड़ी आंत तथा मलाशय के अंदरूनी पर्त में सूजन और घाव बन जाते हैं।
- यह बीमारी ज्यादा समय तक चल सकती है, तथा बार-बार बढ़ और शांत हो सकती है।
- अगर सही समय पर इसका सही इलाज तथा जीवनशैली में बदलाव से काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
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२) अल्सरेटिव कोलाइटिस के इलाज का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- अल्सरेटिव कोलाइटिस का इलाज पुरे तरह से बीमारी को खत्म तो, नहीं करता है, पर इसका लक्ष्य होता है, जैसे की,
- सूजन को कम करना।
- लक्षणों को कण्ट्रोल करना।
- जटिलताओं से बचाव करना.
- दर्दी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार।
- दर्दी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार।
३) अल्सरेटिव कोलाइटिस में डाइट का क्या महत्व होता है?
डाइट को लेने से बीमारी को कंट्रोल करने में अहम रोल निभाता है।
#क्या - क्या खाना चाहिए?
- हल्का, और पच सके ऐसे भोजन का उपयोग करना।
-उबले चावल और दलिया।
- उबली हुए सब्जियां।
- दही
#क्या - क्या नहीं खाना चाहिए?
- ज्यादा मसालेदार और ज्यादा तला भुना हुआ खाना।
- शराब और कैफीन का उपयोग कम करना।
- जंक फूड से दुरी बनाये रखना।
३) अल्सरेटिव कोलाइटिस का लाइफ स्टाइल में परिवर्तन करने से क्या फर्क होता है?
- तनाव को कम करने के लिए रोज कसरत करना.
- योग को रोज ३० मिनट तक करना अच्छा होता है.
- ८ घंटे तक पूरी तरह से नींद को लें.
- धूम्रपान करने से बचे।
- नियमित रूप से डॉ. से फ़ॉलोअप लेना सही होता है.
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- कोई भी तरह के दवा को डॉक्टर से पूछे बिना नहीं लेना चाहिए.
- खून की जांच सही समय पर कराते रहें।
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४) अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या -क्या सावधानियां बर्तना चाहिए?
- कोई भी तरह के दवा को डॉक्टर से पूछे बिना नहीं लेना चाहिए.
- खून की जांच सही समय पर कराते रहें।
- संक्रमण से दुरी बनाये रखें।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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