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Chronic Kidney Disease kya hai? kaise hoti hai?

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule3 min read Playing…
Chronic Kidney Disease kya hai? kaise hoti hai?

गुर्दे की बीमारी (Chronic Kidney Disease / CKD)

 
गुर्दे की बीमारी एक ऐसी समस्या है, जो चुपचाप शुरू होती है और जब तक इसका पता चलता है, तब तक गुर्दे काफी क्षतिग्रस्त हो चुके होते हैं। भारत में लगभग 8 करोड़ लोग किडनी की किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं। मधुमेह और उच्च रक्तचाप इसके सबसे बड़े कारण हैं।
 

गुर्दे की बीमारी (CKD) क्या है?

क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD) वह स्थिति है, जिसमें गुर्दे धीरे-धीरे — महीनों या वर्षों में — अपनी कार्यक्षमता खो देते हैं। हमारे दो गुर्दे प्रतिदिन लगभग 150–200 लीटर रक्त को छानते हैं, विषाक्त पदार्थों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालते हैं, रक्तचाप नियंत्रित करते हैं और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हार्मोन बनाते हैं।

जब गुर्दों की कार्यक्षमता 60% से कम रह जाती है और यह स्थिति 3 महीने से अधिक समय तक बनी रहती है, तो इसे CKD कहा जाता है। CKD को पाँच अवस्थाओं (Stage 1 से 5) में बाँटा जाता है।

Stage 5 को End Stage Renal Disease (ESRD) या किडनी फेलियर कहा जाता है, जिसमें डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है।
 

गुर्दे की बीमारी कैसे होती है?

गुर्दों में लाखों सूक्ष्म छनन इकाइयाँ होती हैं, जिन्हें नेफ्रॉन (Nephrons) कहा जाता है। प्रत्येक नेफ्रॉन में रक्त वाहिनियों का एक छोटा गुच्छा होता है, जिसे ग्लोमेरुलस कहते हैं।
मधुमेह में अधिक शर्करा इन रक्त वाहिनियों को नुकसान पहुँचाती है, जबकि उच्च रक्तचाप में अधिक दबाव इन्हें क्षतिग्रस्त करता है।

जब नेफ्रॉन एक-एक करके नष्ट होते हैं, तो बचे हुए नेफ्रॉन अधिक मेहनत करने लगते हैं। यह अतिरिक्त कार्य धीरे-धीरे उन्हें भी थका देता है। जब कुल कार्यक्षमता 15% से कम रह जाती है, तो डायलिसिस के बिना जीवन संभव नहीं रहता।

शुरुआती अवस्था में इस बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते — इसीलिए मधुमेह और उच्च रक्तचाप के रोगियों में नियमित जाँच अत्यंत आवश्यक है।
 

गुर्दे की बीमारी के कारण?


मधुमेह (Diabetic Nephropathy):
CKD का सबसे बड़ा कारण — लगभग 40% मामलों में जिम्मेदार।

उच्च रक्तचाप (Hypertensive Nephropathy):
लगातार अधिक दबाव गुर्दों की रक्त वाहिनियों को क्षतिग्रस्त करता है।

दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक उपयोग:
Ibuprofen, Diclofenac जैसी दवाओं का नियमित सेवन गुर्दों को नुकसान पहुँचा सकता है।

गुर्दे में पथरी::बार-बार पथरी होने से क्षति हो सकती है।

बार-बार मूत्र संक्रमण (UTI):
अनुपचारित संक्रमण गुर्दों तक पहुँच सकता है।

अनुवांशिक रोग:
जैसे Polycystic Kidney Disease (PKD), जिसमें गुर्दों में सिस्ट बनती हैं।
 

गुर्दे की बीमारी के लक्षण?


शुरुआती अवस्था में कोई लक्षण नहीं होते। बाद की अवस्थाओं में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

- पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन — विशेषतः सुबह आँखों के आसपास
- पेशाब में बदलाव — झाग, खून या मात्रा में परिवर्तन
- थकान और खून की कमी — गुर्दे Erythropoietin बनाना कम कर देते हैं
- भूख न लगना, जी मिचलाना और मुँह में यूरिया जैसी गंध
- त्वचा में खुजली — शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने से
- साँस फूलना — शरीर में तरल जमा होने से फेफड़ों पर दबाव
- हड्डियों में दर्द — गुर्दे Vitamin D को सक्रिय नहीं कर पाते
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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