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Chronic Pancreatitis kyu hota hai? homeopathy me ilaj?

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule5 min read Playing…
Chronic Pancreatitis kyu hota hai? homeopathy me ilaj?

chronic pancreatitis


क्रोनिक पैंक्रिअटिटिस अग्न्याशय की एक दीर्घकालिक (लंबे समय तक चलने वाली) सूजन की स्थिति है। सामान्य भाषा में समझें तो अग्न्याशय हमारे पेट के पीछे स्थित एक ग्रंथि है, जो की हमारे भोजन को पचाने में जरूरी एंजाइम को बनाती है, साथ ही इंसुलिन  हार्मोन भी बनाती है, जो रक्त में शर्करा के लेवल को कण्ट्रोल करते हैं। जब इस अंग में बार-बार सूजन होती है, तो समय के साथ इसकी कोशिकाओं को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। यह क्षति धीरे-धीरे होती है और अक्सर इतनी धीमी होती है कि व्यक्ति को शुरुआती दौर में इसका पता ही नहीं चलता। एक्यूट पैंक्रिअटिटिस (अचानक होने वाली सूजन) से यह इसलिए अलग है क्योंकि यहां सूजन बार-बार होती है और अंग को स्थायी रूप से प्रभावित करती है।

यह शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

जब अग्न्याशय में बार-बार सूजन होती है, तो इसकी सामान्य संरचना और कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। स्वस्थ अग्न्याशय ऊतक धीरे-धीरे रेशेदार (fibrous) ऊतक में बदलने लगते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में फाइब्रोसिस कहा जाता है। इस प्रक्रिया के कारण अग्न्याशय की एंजाइम बनाने की क्षमता कम होने लगती है, जिससे भोजन का पाचन ठीक से नहीं हो पाता।

इसके साथ ही, इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं भी प्रभावित हो सकती हैं, जिससे रक्त शर्करा नियंत्रण में कठिनाई आ सकती है। समय के साथ यह स्थिति अंग की संरचना में स्थायी बदलाव ला सकती है, जिसे वापस पहले जैसा नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि इस स्थिति को गंभीरता से समझना और समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण होता है।

मुख्य कारण?

हर व्यक्ति में कारण अलग -अलग होता है।

लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन इस स्थिति का सबसे आम कारण माना जाता है। लगातार वर्षों तक अधिक मात्रा में शराब का सेवन अग्न्याशय की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है।

जेनेटिक (आनुवंशिक) कारण भी इस स्थिति में भूमिका निभा सकते हैं। कुछ लोगों में परिवार में यह स्थिति पहले से मौजूद होने के कारण जोखिम बढ़ जाता है।

बार-बार होने वाला एक्यूट पैंक्रिअटिटिस भी समय के साथ क्रोनिक रूप ले सकता है, यदि सूजन बार-बार होती रहे और अंग को ठीक होने का पर्याप्त समय न मिले।

पित्ताशय की पथरी (गॉलस्टोन) से जुड़ी समस्याएं भी कभी-कभी इस स्थिति में योगदान दे सकती हैं।

ऑटोइम्यून स्थितियां, जिनमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय पर हमला करने लगती है, भी इसका एक कारण हो सकती हैं।

कुछ मामलों में डॉक्टर स्पष्ट कारण नहीं बता पाते, जिसे इडियोपैथिक पैंक्रिअटिटिस कहा जाता है।

जोखिम कारक?

कुछ लोगों में इस स्थिति के विकसित होने की संभावना अधिक होती है। लंबे समय से भारी मात्रा में शराब का सेवन करने वाले व्यक्तियों में यह जोखिम सबसे अधिक देखा जाता है। धूम्रपान करने वाले लोगों में भी यह जोखिम काफी बढ़ जाता है, और जब शराब व धूम्रपान दोनों साथ में हों, तो यह जोखिम और अधिक हो जाता है।

आनुवंशिक कारणों से जोखिम अधिक हो सकता है।  जिन को बार-बार एक्यूट पैंक्रिअटिटिस का दौरे आते रहे हैं, उन में भी यह स्थिति विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां, जैसे कुछ खास ऑटोइम्यून बीमारियां, भी इस जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

शुरुआती संकेत और लक्षण?

क्रोनिक पैंक्रिअटिटिस के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं और शुरुआत में इन्हें नजरअंदाज किया जा सकता है।

पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द सबसे आम लक्षण है, जो कभी-कभी पीठ की ओर भी फैल सकता है। यह दर्द कभी हल्का तो कभी बेहद तीव्र हो सकता है, और खाना खाने के बाद बढ़ सकता है।

वजन का अचानक कम होना भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो तब होता है जब शरीर भोजन से पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता।

मल में बदलाव, जैसे तैलीय, चिपचिपा या दुर्गंधयुक्त मल आना, यह दर्शाता है कि शरीर वसा को ठीक से पचा नहीं पा रहा है।

बार-बार जी मिचलाना और उल्टी होना भी इस स्थिति के सामान्य लक्षणों में शामिल है।
अत्यधिक थकान और कमजोरी भी कई मरीजों में देखी जाती है, जो पोषण की कमी के कारण हो सकती है।

संभावित जटिलताएँ?
कुपोषण एक और गंभीर समस्या है, क्योंकि शरीर भोजन से जरूरी पोषक तत्व, विशेषकर वसा में घुलनशील विटामिन, ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता।

अग्न्याशय में सिस्ट (स्यूडोसिस्ट) बनना भी एक संभावित जटिलता है, जो कभी-कभी दर्द या अन्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

कुछ अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि लंबे समय तक क्रोनिक पैंक्रिअटिटिस से पीड़ित रहने वाले व्यक्तियों में अग्न्याशय के कैंसर का जोखिम सामान्य से कुछ अधिक हो सकता है, हालांकि यह हर व्यक्ति में नहीं होता।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
यदि आपको बार-बार पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द महसूस हो, खासकर खाना खाने के बाद, तो चिकित्सीय मूल्यांकन कराना उचित है। इसी तरह, अस्पष्ट वजन कम होना, मल में लगातार बदलाव, बार-बार जी मिचलाना या असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखने पर भी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यदि आपके परिवार में पहले से यह स्थिति रही है या आप लंबे समय से अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते रहे हैं, तो नियमित स्वास्थ्य जांच कराना बुद्धिमानी होगी।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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