CAPTCHA  

Already register click here to Login

Dont have account click here for Register

Thank You
Ok
clinical_notesDisease

night eating syndrome treatment in homeopathy

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule3 min read Playing…
night eating syndrome treatment in homeopathy

१) नाइट ईटिंग सिंड्रोम क्या है?


नाइट ईटिंग सिंड्रोम एक विशेष तरह के खान-पान का विकार है, जिसमें व्यक्ति दिन के बजाय शाम या रात के समय में ज्यादा मात्रा में भोजन करते है, विशेष रूप से सोने से पहले या रात को उठकर।

- इस समस्या से शरीर और मन दोनों को असर होता है,और इसकी वजह से सोने का समय , वजन और जीवनशैली पूरी तरह से बदल जाता है।


२) कैसे समझें कि आपको NES है?


नाइट ईटिंग सिंड्रोम की पहचान निम्न तरह से की जा सकती है:
 - दिन के बजाय रात के समय में ज्यादा भूख लगना 

 - रात में बार-बार उठकर कुछ खाने की इच्छा 

 - सुबह में नाश्ता स्किप करना

 - नींद सही से न आना 

 - तनाव या चिंता बढ़ने पर खाने की प्रवृत्ति

NES ज्यादातर 18 से 40 वर्ष के लोगों में ज्यादा देखा जाता है, यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को असर कर सकता है।


३) इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? (Causes of NES)


- तनाव और चिंता : व्यक्ति को तनाव, डिप्रेशन या चिंता की स्थिति में भावनात्मक संतुलन के लिए रात में खाने की आदत पड़ सकती है। 

 - हार्मोनल असंतुलन : मेलाटोनिन और लेप्टिन जैसे हार्मोन, जो नींद और भूख को कण्ट्रोल करते हैं, उनके स्तर में गड़बड़ी होने से NES का कारण बन सकती है।

 - नींद की गड़बड़ी : अनियमित नींद, अनिद्रा या स्लीप वॉकिंग जैसी समस्याएं NES से जुड़ी हो सकती हैं।

 -जीवनशैली से जुड़ी आदतें : देर रात तक जागना, देर से खाना खाने या दिन भर का खाना स्किप करना इस सिंड्रोम को जन्म दे सकता है। 

 - इसके प्रभाव : मोटापा और वजन के बढ़ जाने से - मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर

 

४) कैसे होता है और क्या निदान है? (Diagnosis)


NES का निदान आमतौर पर मरीज की दिनचर्या और खानपान के पैटर्न की जानकारी लेकर किया जाता है।
 इसके लिए : 24 घंटे का खाने का रिकॉर्ड लिया जाता है .

- नींद के पैटर्न को समझा जाता है.

 

५) NES का उपचार?


- दवाएं : एंटीडिप्रेसेंट या मेलाटोनिन जैसे हार्मोन से जुड़ी दवाएं NES के कुछ मरीजों को राहत देती हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

 - नियमित खानपान की योजना : सुबह का नाश्ता ज़रूर करें और दिनभर संतुलित भोजन लें ताकि रात में भूख न लगे।

 - तनाव प्रबंधन : योग, ध्यान और शारीरिक व्यायाम तनाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

 - नींद में सुधार : सोने और जागने का एक समय तय करना , और नींद को प्राथमिकता दें।

#रोकथाम और सावधानियाँ ?


- रोज़ाना एक जैसा खानपान और नींद का रूटीन बनाए रखें।

 - दिन में समय पर ही संतुलित भोजन लें 

 - रात को खाने से बचें, विशेष रूप से जंक फूड 

 - मानसिक तनाव बढ़ने पर तुरंत काउंसलिंग लें

 - जरूरत महसूस हो तो किसी मनोचिकित्सक से संपर्क करें 

 *निष्कर्ष*

 नाइट ईटिंग सिंड्रोम एक गंभीर लेकिन संभाली जा सकने वाली स्थिति है। यह केवल एक बुरी आदत नहीं, बल्कि एक मानसिक और जैविक समस्या है जिसे समय पर पहचाना और संभाला जा सकता है। यदि आप या आपका कोई जानने वाला रात में अनियंत्रित रूप से खाना खा रहा है और उसका प्रभाव नींद, वजन या मूड पर पड़ रहा है, तो उसे हल्के में न लें। डॉक्टर से परामर्श लें और आवश्यक उपचार शुरू करें।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
event_availableBook Appointment

forumComments

अभी तक कोई कमेंट नहीं — पहला आप कीजिए।

अपना कमेंट लिखें
कमेंट जांच के बाद प्रकाशित किया जाएगा।
Brahm homeo Logo
Brahm Homeopathy
Typically replies within an hour
Brahm homeo
Hi there 👋

How can we help you?
NOW
×
Chat with Us