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acute necrotizing ka homeopathic me ilaaj

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule3 min read Playing…

१) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस का इलाज?


एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस बहुत ही गंभीर स्थिति है। इसमें पैंक्रियास के ऊतक नष्ट होकर नेक्रोसिस की अवस्था में चले जाते हैं।

 - यह स्थिति एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस की तुलना में बहुत ही खतरनाक मानी जाती है और यदि समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा हो सकती है।

 
२) एक्यूट नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस का कारण और खतरे क्या है?


नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस के सामान्य कारण हैं, जैसे  की , 

 * पित्ताशय की पथरी

  * ज्यादा शराब का सेवन  

* खून में ट्राइग्लिसराइड का अत्यधिक बढ़ जाना जैसा 

 * कुछ दवाओं का ज्यादा साइड इफेक्ट 

 * पेट की चोट या ऑपरेशन के बाद की जटिलताएं 

 - यह बीमारी तब गंभीर हो जाती है जब पैंक्रियास का ऊतक मरने लगता है और संक्रमण   का खतरा बढ़ जाता है।

 * 

इसके लक्षण



 * तेज और लगातार पेट दर्द (ऊपरी पेट में) 

* मतली और उल्टी 

* बुखार 

* पेट में सूजन और कोमलता

 * भूख न लगना

 * रक्तचाप गिरना और शॉक की स्थिति यदि संक्रमण हो जाए तो मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। 

#३)निदान?



डॉक्टर निम्न जांचों केआधार पर इसकी पुष्टि करते हैं 

 *सीटी स्कैन (CT Scan): – यह सबसे जरुरी जांच है, जिससे नेक्रोसिस की ज्यादा और संक्रमण का पता चलता है।

 * रक्त जांच (Blood Test):– एंजाइम, श्वेत रक्त कोशिकाएं , शुगर और किडनी/लिवर की कार्यक्षमता की जाँच।

 *अल्ट्रासाउंड* : – सूजन  को देखने के लिए। *कल्चर टेस्ट*: – यदि संक्रमण का संदेह हो तो।

 

*४)इलाज*


1.प्रारंभिक चिकित्सा 
 *अस्पताल में भर्ती* : नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस हमेशा अस्पताल में, अक्सर ICU स्तर पर इलाज की मांग करता है। 

 * तरल पदार्थ :  शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए दिया जाता  है।

 * ऑक्सीजन सपोर्ट*: यदि सांस लेने में परेशानी हो रही है तों । 

 * दर्द नियंत्रण* : तेज दर्द को कम करने के लिए दर्दनिवारक की दवाएं दी जाती हैं। 

 * एंटीबायोटिक्स* : केवल तभी दी जाती हैं जब संक्रमण की पुष्टि हो, वरना अनावश्यक एंटीबायोटिक से बचा जाता है।

 # 2. पोषण प्रबंधन 
 * पेशेंट को लंबे समय तक खाना नही देने से शरीर बहुत ही कमजोर हो जाता  है।
 * शुरुआती दिनों में * : नासोजेजुनल ट्यूब से लिक्विड डाइट को दिया जाता है।
 * ज़रूरत पड़ने पर * :  IV के माध्यम से पोषण दिया जाता है।

 

# 3.नेक्रोसिस और संक्रमण का प्रबंधन


* यदि पैंक्रियास का मृत ऊतक **संक्रमित नहीं** है तो  दवाओं से और निगरानी से भी सुधार हो जाता है।

 * यदि **संक्रमित नेक्रोसिस*  है तो सर्जिकल प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ती है: 

 * एंडोस्कोपिक ड्रेनेज* :– एंडोस्कोप के माध्यम से पैंक्रियास से पसया मृत ऊतक निकाला जाता है।

 *अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन की मदद से संक्रमित हुए तरल को बाहर निकाला जाता है।

 

#4. अन्य अंगों की देखभाल


नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस कई बार मल्टी-ऑर्गन फेलियर  का  भी कारण बनता है।

 * किडनी सपोर्ट के **डायलिसिस** भी किया जा सकता है।

 * फेफड़ों अगर ख़राब हो तो  **वेंटिलेटर सपोर्ट** भी  दिया जाता है। 

* ब्लड प्रेशर बनाए रखने के लिए कुछ दवाएं और ICU की मॉनिटरिंग ज़रूरी होती है।

 

#५)जटिलताएँ क्या हो सकती है?


* पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट का होना 

 * रक्त में संक्रमण 

 * अंगों का फ़ैल हो जाना 

 * लंबे समय से  **क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस** में बदल जाना * मधुमेह का हो जाना जैसे

##रिकवरी और जीवनशैली


- इलाज के बाद पेशेंट को जीवनशैली में बदलाव की सलाह दिया जाता है:

 * शराब और धूम्रपान को  पूरी तरह से बंद करना।

 * कम चर्बी वाला आहार लें।

 * समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहें।

 * रक्त शर्करा और लिवर फंक्शन की जांच करना ।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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