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piles treatment in homeopathy | piles ka ilaaj

Dr. Pradeep Kushwaha, M.D. schedule3 min read Playing…
piles treatment in homeopathy | piles ka ilaaj

१) बवासीर (Hemorrhoids) क्या है?


बवासीर सामान्य प्रॉब्लम है, जो की, रक्त वाहिका के बढ़ जाने या सूजने के कारण से होता है।

- जो की गुदा के आसपास होती हैं। भारत में बवासीर के मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है।

- लगभग 50% से भी ज्यादा लोग अपनी जीवन के किसी न किसी समय में बवासीर की समस्या का सामना करते हैं।

- यह समस्या मुख्यतः 40 से 60 उम्र के लोगों में पाई जाती है। आज हम इसके लक्षण ,निदान, कारण के बारे में बात करने वाले है.


२) बवासीर के क्या कारण है?


बवासीर का सबसे मुख्य कारण मलाशय और गुदा के क्षेत्र की नसों में सूजन का होना होता है।
- जब ये नसें पर अधिक दबाव आता हैं, तो इनमें सूजन और रक्त का जमाव होने लगता है। यह बाहरी या आंतरिक दोनों प्रकार की बवासीर का नेतृत्व कर सकती है।

*आंतरिक बवासीर * :: ये गुदा के अंदर होता हैं और आमतौर पर दर्द रहित हैं। लेकिन इससे रक्तस्राव हो सकता है.
 
*बाहरी बवासीर* : : ये गुदा के बाहर होता हैं और इनका दर्द बहुत ही होता है। इन में रक्त का जमा हो जाए, तो यह एक तरह का थक्का बना जाता है, जिसे थ्रामबॉस भी कहा जाता है।

**बवासीर होने के कुछ संभावित कारण इस प्रकार से हैं**


1.बवासीर का सबसे प्रमुख कारण मल त्याग के समय ज्यादा दबाव डालना होता है।

 2. फाइबर की कमी हो जाने से मल कठोर हो जाता है, जिस से की बवासीर का कारण बनता है।

 3. ज्यादा मसालेदार, या तली-भुनी खाद्य पदार्थ बवासीर को और भी बढ़ावा दे सकते हैं। 

 4. शरीर में वजन का ज्यादा होना भी गुदा क्षेत्र पर दबाव डालता है।

 5. गर्भवती महिलाओं में, बच्चे का वजन भी गुदा क्षेत्र पर दबाव डालता है, जिससे बवासीर हो सकता है।

 6. नियमित व्यायाम की कमी से भी इस समस्या का कारण बन जाती है।


३ ) बवासीर के लक्षण इसके प्रकार के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:


- - 1.मल त्याग के समय में अधिक खून का बाहर आना । 

 - 2. गुदा के आसपास के भाग में दर्द का होना। 

 - 3. गुदा के आसपास वाले भाग में सूजन का होना।

 -4 . गुदा के आसपास खुजली होना, जो की बहुत परेशानी का कारण बनता है।

४ ) बवासीर से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें क्या है?


1.अपने भोजन में फाइबर मिलने वाले फल, सब्जियाँ, और अनाज को शामिल करें। 

 2. नियमित कसरत करना जरुरी है। 

 3.दिन में कम से कम ७-८ गिलास पानी को पीना चाहिए। 

 4. मल त्याग के समय दबाव से बचें।

 5. शौचालय का ज्यादा उपयोग करें। ऐसा करने से मल जमेगा नहीं और बवासीर की कम होगी।
इलाज शुरू करने के लिए तैयार हैं?
डॉ. प्रदीप कुशवाहा से परामर्श बुक करें — ऑनलाइन या क्लीनिक पर।
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